
हिंदी साहित्य भारती
"हिंदी साहित्य भारती एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जो सनातन के संवर्धन और भारतीय सनातन जीवन-मूल्यों की वैश्विक पुनर्स्थापना के लिए समर्पित है।"
इसकी स्थापना इस संकल्प के साथ की गई थी कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहिका होती है।
स्थापना और
विकास
प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व शिक्षा मंत्री उ.प्र. डॉ. रवीन्द्र शुक्ल तथा देश एवं विदेश के अनेक विद्वानों ने भारतीय संस्कृति की पुनर्प्रतिष्ठा, हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के उत्थान का संकल्प लेकर व्यापक मंथन के बाद 15 जुलाई 2020 को संस्था का गठन किया।
आज हिंदी साहित्य भारती विश्व के 37 देशों, भारत के प्रत्येक प्रदेश, जनपदीय एवं महानगरीय स्तर पर सक्रियता के साथ अपने संकल्प को पूर्ण करने में लगी हुई है। यह विश्व की एक अभिनव और सबसे बड़ी संस्था है।
संस्था से अनेक पूर्व राज्यपाल, कुलाधिपति, कुलपति, प्राचार्य और ख्यातिलब्ध साहित्यकार जुड़े हैं। नवोदित प्रतिभाशाली साहित्यकारों के साथ-साथ अनेक साहित्यप्रेमी पूर्ण निष्ठा एवं समर्पणभाव से इस अभियान का हिस्सा हैं।
अयं बन्धुरयं नेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
महोपनिषद: अध्याय 6, मंत्र 71
"यह अपना मित्र है और यह नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों के लिए तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।"
हिंदी साहित्य भारती ने “मानव बन जाए जग सारा” को अपना ध्येय बनाकर शांति स्थापना के लिए आंदोलन प्रारम्भ किया है।
संस्था के उद्देश्य
विश्व शांति
सकारात्मक सोच के बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाना।
सनातन चेतना
सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करना।
साहित्यिक माध्यम
सम्पूर्ण साहित्य को माध्यम बनाकर मूल्यों का विकास।
हिंदी का गौरव
हिंदी को सम्पर्क और राष्ट्रभाषा की प्रतिष्ठा दिलाना।
युवा संस्कार
युवा पीढ़ी में संस्कार के लिए कार्यक्रमों की रचना।
लेखक सहयोग
रचनाकारों को हर प्रकार का साहित्यिक सहयोग देना।
शोध एवं यथार्थ
साहित्य में भारत की गरिमा के प्रक्षेपणों का शोध।
शिक्षा समावेशन
मानव कल्याणकारी साहित्य को पाठ्यक्रमों में जोड़ना।
काव्य मंच
विश्व स्तर पर काव्य मंचों द्वारा समाज को संस्कार।
संगठन विस्तार
शिक्षण संस्थानों में संगठन का अहर्निश विस्तार।
प्रदूषण मुक्ति
साहित्य के प्रदूषण को समाप्त कर श्रेष्ठता लाना।
मूल्य प्रसार
आदर्श मानवीय जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना।
राष्ट्रार्पण
साहित्यकारों को राष्ट्रार्पण के भाव से प्रेरित करना।
वैश्विक मंच
उत्कृष्ट साहित्यकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाना।
साहित्यिक विकास
सेमिनार व कार्यशालाओं से साहित्य का उन्नयन।
सम्पन्न संस्था
अतिथि गृहों का निर्माण व सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था।
साहित्य भारती का संविधान
हिन्दी साहित्य भारती के नियमों, उद्देश्यों, और संरचना को विस्तार से जानने के लिए आधिकारिक संविधान पढ़ें।
संविधान पढ़ें
डॉ. रवीन्द्र शुक्ल
राष्ट्रीय कवि एवं साहित्यकार
संकल्प 70/A-5 अयोध्यापुरी, झाँसी (उ.प्र.)
kaviravindrashukla@gmail.com
साहित्य और राजनीति के अद्वितीय समन्वय
"कोई चलता पद चिन्हों पर, कोई पग चिन्ह बनाता है,
पग चिन्ह बनाने वाला ही दुनिया में पूजा जाता है।"
प्रख्यात राष्ट्रवादी चिंतक, पूर्व राज्यमंत्री (उ.प्र. सरकार) एवं चार बार झाँसी के विधायक रहे डॉ. रवीन्द्र शुक्ल ने अपना सम्पूर्ण जीवन हिंदी साहित्य एवं सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित कर दिया है।
विश्वव्यापी हिंदी मिशन
विश्व के 37 देशों में हिंदी साहित्य भारती का विस्तार कर भाषा को वैश्विक गौरव दिलाया।
संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा
राम मंदिर आन्दोलन, सम्पूर्ण क्रांति एवं आपातकाल के दौरान अनेक बार कारागार में निरुद्ध।
संस्थापक गण
हिंदी साहित्य भारती की नींव रखने वाले एवं इसे दिशा प्रदान करने वाले हमारे आदरणीय संस्थापक सदस्य
संस्थापक सदस्य
डॉ. राम प्रसाद शुक्ल
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
प्रो. सरिता वर्मा
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
श्री विकास मिश्र
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
डॉ. अर्चना पाठक
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
श्री संजय सिंह
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
डॉ. नीलम श्रीवास्तव
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
श्री राजेश खन्ना
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
डॉ. कविता सिंह
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
श्री आलोक रंजन
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
डॉ. सुनीता भारती
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
श्री मनोज तिवारी
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
संस्थापक सदस्य
डॉ. दीपक शर्मा
हिंदी साहित्य भारती के विकास एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
सम्मानित ट्रस्टी
संस्था को दिशा एवं ऊर्जा प्रदान करने वाले हमारे आदरणीय ट्रस्टीगण
हिंदी साहित्य भारती
"हिंदी को बाज़ार की भाषा के स्थान पर संस्कार की भाषा बनाना हमारा संकल्प है।"
स्थापना तिथि
15 जुलाई 2020
एक युवा और प्रभावशाली संगठन
संस्थापक
डॉ. रवींद्र शुक्ल
पूर्व शिक्षा मंत्री एवं देश के विद्वान
पंजीकरण
अंतरराष्ट्रीय न्यास
पंजीकृत अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था
वैश्विक विस्तार
कनाडा, मॉरीशस, इज़राइल, रूस और दुबई जैसे देशों में सक्रिय समितियां।
संपर्क एवं निर्देश
प्रधान कार्यालय
झांसी, उत्तर प्रदेश
मार्गदर्शक मंडल
पूर्व राज्यपालों (स्व. केशरीनाथ त्रिपाठी, कप्तान सिंह सोलंकी) और आध्यात्मिक गुरुओं का संरक्षण।
मुख्य कार्यशैली
- अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां
- साहित्यकारों का सम्मान
- विश्व रिकॉर्ड जैसे बड़े आयोजन
- हिंदी का वैश्विक प्रचार
प्रतिष्ठित सम्मान
संस्था हर साल 'हिंदी साहित्य भारती पुरस्कार' प्रदान करती है।
"2024 में मुम्बई के पूर्व पुलिस कमिश्नर कृष्णा प्रकाश को सम्मानित किया गया।"
संकल्प
बीज बनकर आज हम, नव सृष्टि की रचना करेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे
मिल गया निज तंत्र फिर भी, दैन्यता हटने न पाई
बस प्रगति के नाम हमने, नीति-पथ को दी विदाई
स्वप्न पुरखों का अधूरा, आज हम पूरा करेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे
सत्य को देकर तिलांजलि, झूठ का सम्बल रहा है
ध्येय निष्ठा को भुलाया, भवन संस्कृति का ढहा है
ध्येय पथ की साधना से, सृजन की वर्षा करेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे।
मिट रही है वसुन्धरा अब, शत्रुता घनघोर छाई
स्वार्थ की स्वच्छन्दता ने मनुजता को दी विदाई
श्रेष्ठ है परमार्थ श्रद्धा भावना विकसित करेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे।
जातियों का विष भयकर, फैलता ही जा रहा है
राष्ट्र की ममता मिटाकर नेह को ही खा रहा है
किन्तु हम अपनी धरा पर, बेल यह पलने न देंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे।
आस्तर जिसको दिया था, मित्रता का प्यार देने
वह खड़ा है अब दंग दे, हम सभी के प्राण लेने
कर अपरिमित शक्ति संचित दुष्ट दानवता हरेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे।
रक्त की गंगा बहाकर, त्यागमय स्वातंत्र्य पाया
कफन सिर पर बाँध बन्दे मातरम् का गीत गाया
प्रेरणा लेकर उन्हीं से क्रान्ति की ज्वाला बनेंगे
हो गई है जड़ मनुजता, चेतना फिर से भरेंगे।
रचनाकार
डॉ० रवीन्द्र शुक्ल
निर्देशक मंडल
हिंदी साहित्य भारती को वैश्विक ऊंचाइयों तक ले जाने वाले हमारे सम्मानित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पदाधिकारी
सांस्कृतिक सक्रियता
एवं उपलब्धियाँ
हिंदी को वैश्विक स्तर पर 'संस्कार और संस्कृति की भाषा' के रूप में स्थापित करने का हमारा सफर।
सब में राम शाश्वत श्री राम:
विश्व कीर्तिमान
मुम्बई में आयोजित कार्यक्रम में चीन का 13 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर, भगवान राम को समर्पित हज़ारों पोस्टकार्ड लिखकर "Largest Postcard Sentence" का विश्व कीर्तिमान रचा।

'काव्य भारती'
एवं प्रकाशन
प्रतिभाशाली लेखकों को मंच प्रदान करना जिनकी रचनाएं संसाधनों के अभाव में प्रकाशित नहीं हो पातीं।
अंतरराष्ट्रीय शाखाएं
वैश्विक अध्याय
कनाडा
कनाडा हिंदी महोत्सव एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन
रूस
विश्वविद्यालयी संगोष्ठियाँ एवं साहित्य अनुवाद कार्यशाला
मॉरीशस
विश्व हिंदी सचिवालय के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान
इज़राइल
भारतीय दूतावास के साथ हिंदी दिवस एवं सांस्कृतिक संध्या
दुबई / नाइजीरिया
व्यापारिक हिंदी एवं साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन
भविष्य की योजनाएँ
हिंदी विश्वविद्यालय सञ्जाल
दुनिया भर के हिंदी शिक्षण संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाना।
अंकीय ग्रंथागार
हिंदी के दुर्लभ ग्रंथों को वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाना।
"हम केवल आज का नहीं, हिंदी के स्वर्णिम कल का निर्माण कर रहे हैं।"
राष्ट्र वंदन: एक त्रिवेणी संगम
सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महा-अभियान
1. राष्ट्र वंदन: अतीत का अभिनंदन
यह सत्र भारत की सांस्कृतिक विरासत और हिंदी साहित्य के उन महान साहित्यकारों को समर्पित होता है जिन्होंने भाषा की नींव रखी।
लक्ष्य: तुलसीदास, कबीर, निराला और प्रेमचंद जैसे 'युग पुरुषों' के योगदान पर चर्चा। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना ही मुख्य उद्देश्य है।
2. राष्ट्र वंदन: वर्तमान का अभिनंदन
इस चरण में वर्तमान समय में हिंदी भाषा की सेवा कर रहे विद्वानों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया जाता है।
लक्ष्य: हिंदी साहित्य भारती सम्मान (जैसे जून 2024 में IPS कृष्ण प्रकाश का सम्मान) और डिजिटल युग में हिंदी की प्रासंगिकता पर विमर्श।
3. राष्ट्र वंदन: कवि अभिनंदन
कविता को हिंदी साहित्य का हृदय माना जाता है, इसलिए यह सत्र पूरी तरह से एक भव्य 'कवि सम्मेलन' के रूप में आयोजित होता है।
लक्ष्य: देश-विदेश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का स्वर बुलंद करना। यह कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक हिस्सा होता है।
युवा प्रोत्साहन
भावी पीढ़ी का सशक्तीकरण
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद, कविता प्रतियोगिताओं और कार्यशालाओं के माध्यम से भाषाई संस्कार भरना।
सांस्कृतिक संगम
विविधता में एकता
विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और लोक-साहित्य के साथ हिंदी का सामंजस्य स्थापित कर सर्व-भारतीय चेतना का जागरण।
हमारी शाखाएं
भारत के राज्य
पूरे भारत में हमारी उपस्थिति है। अपने राज्य को खोजें और हमसे जुड़ें।
वार्षिक कार्यक्रम रूपरेखा
संस्था द्वारा वर्ष भर आयोजित होने वाले प्रमुख सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उत्सवों का विवरण।
अनिवार्य कार्यक्रम
विवेकानन्द जयंती
युवा चेतना और दार्शनिक प्रेरणा पर्व
वसंत पंचमी
सरस्वती जयंती एवं विद्या पर्व
वर्ष प्रतिपदा
भारतीय नव वर्ष का भव्य उत्सव
तुलसीदास जयंती
रामचरितमानस रचनाकार स्मृति पर्व
बाल्मीकि जयंती
आदिकवि स्मृति एवं सामाजिक समरसता
विजयादशमी
अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव
समर्पण दिवस (15 जुलाई)
हिंदी साहित्य भारती स्थापना दिवस
ऐच्छिक कार्यक्रम
विशेष लक्ष्य
"भारतीय अस्मिता एवं सांस्कृतिक चेतना के मुखर राष्ट्रीय एवं स्थानीय नायकों की जयंती मनाना तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से भावी पीढ़ी में प्रेरणा भरने हेतु प्रभावी कार्यक्रम करना।"
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ (संस्कारक्षम) आयोजित करना हमारी संस्था का मुख्य ध्येय है।
उपलब्धियाँ एवं मान्यता
चार दशकों की निरंतर सेवा में प्राप्त सम्मान और उपलब्धियाँ
राष्ट्रीय सम्मान
- हिंदी सेवा सम्मान - राष्ट्रपति द्वारा (2020)
- साहित्य रत्न पुरस्कार (2018)
- भाषा भूषण सम्मान (2015)
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
- विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रतिनिधित्व (2019, 2022)
- अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव आयोजन
- 20+ देशों में साहित्यिक कार्यक्रम
प्रकाशन उपलब्धियाँ
- 200+ पुस्तकों का प्रकाशन
- त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य दर्पण'
- 50+ शोध पत्रों का प्रकाशन
सामाजिक योगदान
- 100+ ग्रामीण पुस्तकालयों की स्थापना
- 10,000+ छात्रों को छात्रवृत्ति
- साक्षरता अभियान में योगदान
हमारी यादें
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हमारे साहित्य समारोहों और आयोजनों की सुंदर तस्वीरें
साहित्य का संसार
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प्रसिद्ध लेखकों और कवियों के साहित्यिक प्रस्तुतियां
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संपर्क जानकारी
मोबाइल
+91 98765 43210
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कार्यालय पता
123, साहित्य मार्ग, कवि नगर, नई दिल्ली - 110001
वेबसाइट
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